AI के खतरे और धोखाधड़ी

AI डीपफेक क्या है और अपने परिवार को इससे कैसे बचाएँ?

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डीपफेक ऐसी बनाई या बदली गई फोटो, आवाज या वीडियो है जिसमें कोई व्यक्ति वह बात कहता या करता दिखे जो उसने की ही नहीं। वह असली जैसा लग सकता है। इसलिए केवल देखकर भरोसा न करें; स्रोत, तारीख और स्वतंत्र पुष्टि देखें तथा नुकसान पहुँचाने वाला संदेश आगे न भेजें।

डिजिटल दावे की जाँच करता आवर्धक काँच

अभिभावक समूह में वीडियो आता है जिसमें स्कूल का अधिकारी अचानक छुट्टी बताता दिखता है। उसे आगे भेजने के बजाय माता-पिता आधिकारिक नोटिस देखें और पहले से ज्ञात स्कूल नंबर पर पूछें। वीडियो में किसी का चेहरा होना सूचना की पुष्टि नहीं है।

क्या हर बदली हुई तस्वीर डीपफेक है?

नहीं। साफ तौर पर बताया कार्टून और धोखा देने वाली नकली पहचान अलग हैं। लेकिन सामान्य संपादन, गलत शीर्षक या पुराना वीडियो भी नुकसान कर सकता है। सावधानी रखने के लिए पहले यह साबित करना जरूरी नहीं कि कौन-सी तकनीक लगी है।

पूछें कि संदेश आपसे क्या करवाना चाहता है: पैसे भेजना, जानकारी देना, किसी को बदनाम करना या डर फैलाना? बहुत जल्दी करने का दबाव हो तो और सावधानी रखें।

संदिग्ध सामग्री कैसे जाँचें?

मूल स्रोत और तारीख खोजें। भरोसेमंद आधिकारिक माध्यम से वही सूचना मिलती है या नहीं देखें। संबंधित व्यक्ति से अपने पहले से ज्ञात नंबर पर बात करें, संदेश में दिए नए नंबर पर नहीं।

चेहरे या होंठ की अजीब हरकत संकेत हो सकती है, लेकिन सब सामान्य दिखे तो भी सच साबित नहीं होता। साफ नकली वीडियो और धुँधला असली वीडियो दोनों संभव हैं। सिर्फ क्लिप देखकर किसी पर आरोप न लगाएँ।

सामान्य फोटो की सुरक्षा क्यों जरूरी है?

फोटो से चेहरा, वर्दी, नाम और रोज की जगह का पता चल सकता है। eSafety का स्कूल तस्वीरों पर मार्गदर्शन ऐसे संकेत और बदली सामग्री से निपटने की सावधानी बताता है। यह व्यावहारिक जानकारी है, भारत की शिकायत सेवा नहीं। AI-S16: जानकारी का स्रोत

गैरजरूरी सार्वजनिक फोटो कम रखें, बच्चे की राय लें और देखने वालों की सूची जाँचें। प्राइवेसी सेटिंग मदद करती है, लेकिन साझा तस्वीर की नकल कभी नहीं बनेगी इसकी गारंटी नहीं देती।

बच्चे को निशाना बनाया जाए तो क्या करें?

शांत होकर कहें कि गलत इस्तेमाल उसकी गलती नहीं है। प्लेटफॉर्म पर सामग्री और खाते की शिकायत करें। लिंक, खाते का नाम, समय और धमकी जैसे सुरक्षित विवरण लिखें।

बच्चों की नग्न या यौन तस्वीर, चाहे बदली हुई हो, सबूत के लिए भी डाउनलोड, सहेजें या आगे न भेजें। उचित भारतीय पुलिस और साइबर शिकायत सहायता लें। तुरंत खतरा हो तो आपात मदद चाहिए।

घर में काल्पनिक घोषणा लेकर पूछें, “यह किसने जारी की? कहाँ पुष्टि मिलेगी? इससे क्या करवाया जा रहा है?” एक खास निशान से नकली पहचानने के बजाय जाँचने की आदत सिखाएँ।

कहाँ देखें जानकारी का स्रोत?

क्या पढ़ें इसके बाद?

जानकारी का स्रोत देखना चाहते हैं?

इन नोट में बताया गया है कि लेख के लिए क्या जाँचा गया था। यह तारीख जानकारी की जाँच की है, प्रकाशन की नहीं।

  • AI-S16: Sharing school photos and videos in the age of AI and deepfakes

    Australian eSafety Commissioner

    संबंधित भाग: Identification clues; collect safe evidence; never save/share child sexual imagery

    कैसे जाँचा गया: आधिकारिक पाठ प्राप्त हुआ

    Use names, URLs, handles and times for harmful child sexual material, not copies of that material.

अगली जाँच की योजना:

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